हनईबन–जगमड़वा लाइमस्टोन ब्लॉक की नीलामी शुरू — सरकारी दस्तावेज़ ने खोला नया विवाद, अधिकारी बोले जानकारी नहीं

हनईबन–जगमड़वा लाइमस्टोन ब्लॉक की नीलामी शुरू — सरकारी दस्तावेज़ ने खोला नया विवाद, अधिकारी बोले जानकारी नहीं

00 MSTC की कैटलॉग से पुष्टि — 10 नवंबर से 9 दिसंबर तक चालू रही नीलामी प्रक्रिया

खैरागढ़. क्षेत्र में खनन को लेकर चल रहे तनाव के बीच एक और बड़ी जानकारी सामने आई है। सरकार की अधिकृत एजेंसी MSTC द्वारा जारी Detailed Auction Catalogue के मुताबिक हनईबन, जगमड़वा और मरदकटेरा क्षेत्र के चुनाखदान ब्लॉक की ई-नीलामी 10 नवंबर 2025 सुबह 11:00 बजे से शुरू होकर 9 दिसंबर 2025 दोपहर 3:00 बजे तक सक्रिय रही। कैटलॉग नंबर MSTC/RPR/MINERAL RESOURCES DEPARTMENT/21/25-26/35248 में स्पष्ट रूप से ‘Jagmadwa–Hanaibandh–Mardkathera Limestone Block’ को एक लॉट के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, जिससे यह साफ है कि खनिज विभाग ने आधिकारिक रूप से नीलामी प्रक्रिया शुरू कर दी थी।

स्थानीय खनिज अधिकारी की प्रतिक्रिया ने बढ़ाया संदेह — “मालूम नहीं” बयान पर उठे सवाल

जब मीडिया ने इस नीलामी पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो स्थानीय खनिज अधिकारी इंद्रलाल ने कहा कि उन्हें इस संबंध में कोई जानकारी नहीं है। यह बयान सामने आते ही क्षेत्र में विरोध और तेज हो गया, क्योंकि MSTC के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध दस्तावेज़ों में नीलामी की पूरी सूचना स्पष्ट दर्ज है। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का सवाल है कि—क्या विभाग के अंदर जानकारी छिपाई जा रही है, या अधिकारी खनन गतिविधियों से जनता को अनभिज्ञ रखना चाहते हैं? यह विरोधाभास प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है।

श्री सीमेंट विवाद के बीच नई नीलामी से ग्रामीणों की चिंता दोगुनी

पहले ही श्री सीमेंट परियोजना को लेकर 39 गाँवों का आंदोलन तेज है—पंचायतें, सामाजिक संगठन, किसान और जनप्रतिनिधि लगातार जनसुनवाई रद्द करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे माहौल में हनईबन–जगमड़वा जैसे नए खदान ब्लॉक की नीलामी ने ग्रामीणों में नई चिंता पैदा कर दी है। लोगों का कहना है कि जब एक परियोजना पर क्षेत्र पहले से उथल-पुथल में है, उसी बीच दूसरी खदान की नीलामी प्रशासन की छिपी हुई खनन नीति को उजागर करती है। ग्रामीणों ने मांग की है कि सरकार तत्काल नीलामी की प्रक्रिया पर स्पष्टीकरण दे और प्रभावित क्षेत्रों के पर्यावरण एवं आजीविका पर पड़ने वाले प्रभावों की सार्वजनिक समीक्षा करे, अन्यथा आंदोलन और व्यापक हो सकता है।