जनप्रतिनिधि किसान के साथ खड़े हों, नहीं तो इस्तीफ़ा दें- लोकेश्वरी जंघेल
00 हम 40 गाँव को धूल में नहीं दबने देंगे—महिला किसानों की गरज, प्राइवेट परियोजना का तीखा विरोध
खैरागढ़. श्री सीमेंट परियोजना के खिलाफ शनिवार को हुए बड़े विरोध प्रदर्शन में महिला किसानों की आवाज़ सबसे प्रखर रही। रैली के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए ग्राम जंगलपुर की महिला किसान लोकेश्वरी जंघेल ने पूरे आंदोलन को नई दिशा देने वाला बयान दिया।
यह सरकारी नहीं, प्राइवेट परियोजना है—हम अपनी उपजाऊ ज़मीन नहीं देंगे
एंकर द्वारा पूछे गए सवाल—क्या मांग है आपकी?—पर लोकेश्वरी जंघेल ने बेबाकी से कहा— हमारी मांग साफ है—यह प्राइवेट परियोजना है, अगर यह सरकारी परियोजना होती और कृषि के हित में होती, तो हम अपनी ज़मीन देने पर विचार करते भी। लेकिन हम अपनी उपजाऊ खेती-किसानी वाली ज़मीन किसी निजी कंपनी को नहीं देंगे। हमारे 40 गाँव को धूल-मिट्टी में दबने नहीं देंगे। हमारे क्षेत्र में प्रदूषण नहीं होने देंगे। यह हमारी अंतिम मांग है।
जनसुनवाई नहीं रुकी तो आंदोलन और तेज़ होगा
जब रिपोर्टर ने पूछा—अगर 11 तारीख को जनसुनवाई रद्द नहीं हुई तो आगे क्या रणनीति होगी?
तो जंघेल ने स्पष्ट कहा— हमारा आंदोलन जारी रहेगा, और इससे भी ज्यादा मजबूत होगा। और मैं पूरे क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों से—चाहे वे किसी भी पार्टी के हों—निवेदन करती हूँ कि किसानों के साथ खड़े हों… या फिर इस्तीफ़ा दे दें! यह बयान सुनकर आसपास मौजूद महिला किसानों ने जोरदार नारेबाज़ी की—किसान एकता ज़िंदाबाद!
उन्होंने अपना परिचय देते हुए कहा - मैं लोकेश्वरी जंघेल, ग्राम जंगलपुर की महिला किसान। मैं अपने क्षेत्र की जनता और किसानों के साथ हमेशा खड़ी रहूँगी। महिलाओं की यह सक्रिय भूमिका आंदोलन को और अधिक मजबूत बना रही है। शनिवार की रैली में हजारों महिलाओं की उपस्थिति ने संकेत दिया कि श्री सीमेंट की खदान परियोजना का विरोध अब केवल पुरुषों की लड़ाई नहीं—बल्कि पूरे परिवारों, पूरे गांवों और पूरे समुदाय की लड़ाई बन चुका है।