सीमेंट फैक्ट्री का दलाल कौन?”—किसान रैली में गूंजे नारे ने खड़ा किया बड़ा सवाल

खैरागढ़. “सीमेंट फैक्ट्री के दलालों को जूता मारो…”—यह नारा शनिवार की विशाल किसान रैली में सबसे तीखे स्वर में उभरा और पूरे क्षेत्र में एक बड़ा सवाल खड़ा कर गया कि आखिर ये ‘दलाल’ कौन हैं जिनके खिलाफ किसानों का गुस्सा इतना भड़क उठा है। रैली में शामिल ग्रामीणों का कहना था कि जो लोग कंपनी के लिए जमीन उपलब्ध कराने, किसानों को भ्रमित करने और परियोजना का समर्थन जुटाने में सक्रिय हैं, वही इस नारे का असली निशाना हैं। ग्रामीण याद दिलाते हैं कि कुछ दिन पहले ही फर्जी हस्ताक्षरों के मामले में थाने में आवेदन दिया गया था, जिसमें कंपनी के एजेंटों पर बुजुर्गों और नाबालिगों से झूठ बोलकर दस्तावेज़ भरवाने का गंभीर आरोप लगाया गया था। किसानों और अन्य के बीच यह चर्चा तेज है कि शायद वही लोग इस आंदोलन में ‘दलाल’ कहे जा रहे हैं।

रोजगार का झांसा, खेती का नुकसान—किसान बोले: यही असली ‘दलाली’ है

रैली में कई किसानों ने खुलकर कहा कि कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोग गांव-गांव घूमकर परियोजना के समर्थन में वातावरण बनाने की कोशिश कर रहे हैं। इन लोगों ने रोजगार और विकास का झांसा देकर कई जगह बैठकों का आयोजन किया, जबकि कंपनी की रिपोर्ट में खुद स्वीकार किया गया है कि परियोजना से सिर्फ 138 लोगों को रोजगार मिलेगा। दूसरी ओर, 3000 से अधिक परिवार इस भूमि पर खेती-किसानी कर जीवन यापन करते हैं। ऐसे में किसानों का कहना है कि जो भी व्यक्ति कंपनी के हित में काम कर रहा है—चाहे वह छोटा एजेंट हो या बड़ा राजनीतिक चेहरा—वह उनके अनुसार ‘दलाल’ की परिभाषा में आता है।

फर्जी हस्ताक्षरों से लेकर नेताओं की भूमिका तक—किसानों के सवाल तेज

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि फर्जी हस्ताक्षर और समर्थन-पत्र जैसी घटनाएँ किसी आम व्यक्ति के बस की नहीं हैं। उनकी मान्यता है कि यदि प्रशासन चाहे तो 24 घंटे में यह पता लगा सकता है कि ऐसे दस्तावेज़ किसके निर्देश पर तैयार हुए और कंपनी के लिए सक्रिय रूप से कौन लोग गांवों में घूमते रहे। भीड़ में चर्चा ये भी थी कि यदि बड़े नेता इसमें शामिल न होते, तो न तो ऐसी फर्जीवाड़ा संभव होता और न ही कंपनी प्रतिनिधियों का इतना मनोबल बढ़ता। हालांकि किसी का नाम सार्वजनिक रूप से नहीं लिया गया, पर किसानों के बीच संदेह और अविश्वास तेजी से फैल रहा है।

हमारी जमीन बेचवाने वाले ही असली विरोधी —किसान बोले, नाम उजागर करेंगे

किसानों का तर्क साफ है—जो उनकी जमीन और भविष्य को खतरे में डाल रहा है, वही उनका विरोधी है, चाहे वह बाहर से आया व्यक्ति हो या गांव का अपना ही कोई। इसलिए नारे इतने तीखे हैं और गुस्सा इतना बढ़ा हुआ है। आंदोलनकारियों का कहना है कि आने वाले दिनों में वे सभी संबंधित नामों को सार्वजनिक करेंगे, ताकि ग्रामीणों के साथ विश्वासघात करने वाले लोग उजागर हो सकें। किसानों के अनुसार, यह लड़ाई कंपनी से ज्यादा उन स्थानीय तत्वों के खिलाफ है जो “गांव के बीच बैठकर जमीन बेचने का खेल” खेल रहे हैं।