साल्हेवारा–छुईखदान बना खनन हॉटस्पॉट, गोपालटोला की 1217 हेक्टेयर लौह अयस्क ब्लॉक नीलामी प्रक्रिया पूरी
रिपोर्टर उमेश्वर वर्मा
खैरागढ़. साल्हेवारा–छुईखदान क्षेत्र तेजी से छत्तीसगढ़ के उभरते हुए खनन हॉटस्पॉट के रूप में अपनी पहचान मजबूत करता जा रहा है। नचनिया, भाजीडोंगरी, जगमड़वा–हनाईबन–मरदकठेरा और संडी ब्लॉकों के बाद अब गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक भी इसी श्रृंखला में जुड़ गया है। एमएसटीसी के आधिकारिक ई-ऑक्शन पोर्टल के अनुसार गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक की ई-नीलामी एवं निविदा प्रक्रिया नवंबर माह में निर्धारित समय-सीमा के भीतर संपन्न हो चुकी है, जिससे यह संकेत स्पष्ट है कि क्षेत्र में खनन गतिविधियों की दिशा में ठोस प्रगति हो रही है।
एमएसटीसी पोर्टल पर 10 से 19 नवंबर तक चली ई-नीलामी
खनिज संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ द्वारा गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक के लिए कंपोजिट लाइसेंस की ई-नीलामी एमएसटीसी पोर्टल के माध्यम से आयोजित की गई थी। पोर्टल पर उपलब्ध विवरण के अनुसार यह प्रक्रिया 10 नवंबर 2025 को प्रारंभ होकर 19 नवंबर 2025 को समाप्त हुई। निर्धारित अवधि में बोली प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही तकनीकी एवं वित्तीय मूल्यांकन तथा सफल बोलीदाता से जुड़ी आगे की औपचारिकताओं का रास्ता खुल गया है।

तीन गांवों में फैला 1217 हेक्टेयर का विशाल खनिज क्षेत्र
गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक साल्हेवारा तहसील के गोपालटोला, बांसभीरा और लालपुर के जंगलों में विस्तारित है। कुल 1217 हेक्टेयर क्षेत्रफल वाला यह ब्लॉक पूर्ण रूप से खनिजयुक्त माना गया है। भूविज्ञान एवं खनन निदेशालय द्वारा यहां जी-4 स्तर का प्रारंभिक अन्वेषण किया जा चुका है, जो आगे के विस्तृत सर्वेक्षण के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है। क्षेत्रफल और खनिज निरंतरता के लिहाज से यह जिला के प्रमुख लौह अयस्क ब्लॉकों में शामिल है।
8.85 मिलियन टन संसाधन, उच्च ग्रेड अयस्क की बड़ी हिस्सेदारी
उपलब्ध भूवैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार गोपालटोला ब्लॉक में कुल 8.85 मिलियन टन लौह अयस्क संसाधन अनुमानित हैं। इसमें 7.20 मिलियन टन उच्च ग्रेड (65 प्रतिशत से अधिक), 0.21 मिलियन टन मध्यम ग्रेड तथा 1.44 मिलियन टन निम्न ग्रेड अयस्क शामिल है। चार प्रमुख लैटेरिटिक खनिज क्षेत्रों में किए गए बोरहोल परीक्षणों में अयस्क स्तंभ की मोटाई 3 से 8 मीटर तक पाई गई है, जिसे भविष्य के खनन के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

कंपोजिट लाइसेंस के बाद अन्वेषण से तय होगा खनन
कंपोजिट लाइसेंस की प्रक्रिया के तहत सफल बोलीदाता को पहले विस्तृत खनिज अन्वेषण करना होगा। यदि अन्वेषण में व्यावसायिक रूप से उपयुक्त मात्रा में लौह अयस्क की पुष्टि होती है, तो उसी कंपनी को आगे चलकर खनन पट्टा प्रदान किया जाएगा। इसके बाद माइनिंग प्लान की स्वीकृति, पर्यावरणीय अनुमति, विस्फोटक लाइसेंस तथा आवश्यकता अनुसार वन एवं अन्य वैधानिक स्वीकृतियाँ लेना अनिवार्य होगा। पूरी प्रक्रिया चरणबद्ध और नियमानुसार आगे बढ़ेगी।
अधिकारी का स्पष्टीकरण: गोपाल टोला ब्लॉक एक्शन प्लेटफार्म पर है
इस संबंध में जिले के सहायक खनिज अधिकारी बबलू पांडे ने स्पष्ट किया कि गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक फिलहाल एमएसटीसी के ऑक्शन प्लेटफार्म पर दर्शित है। उन्होंने कहा कि जब तक नीलामी प्रक्रिया पूर्ण होने के बाद विभाग को एलओआई, राशि जमा होने अथवा लिखित आधिकारिक सूचना प्राप्त नहीं हो जाती, तब तक किसी कंपनी को ब्लॉक आवंटन की औपचारिक पुष्टि नहीं मानी जा सकती। विभाग को वर्तमान में जानकारी पोर्टल के माध्यम से मिल रही है और आगे की कार्रवाई राज्य स्तर से निर्देश मिलने के बाद ही की जाएगी।
विकास और जनचिंताओं की दोहरी चुनौती
विशेषज्ञों के अनुसार गोपालटोला ब्लॉक की नीलामी प्रक्रिया का पूरा होना साल्हेवारा–छुईखदान क्षेत्र में खनन आधारित औद्योगिक विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हालांकि संडी में प्रस्तावित श्री सीमेंट परियोजना को लेकर पहले से मौजूद जनचिंताओं के चलते आने वाली खनन परियोजनाओं में पर्यावरण संतुलन, ग्रामसभा की भूमिका और स्थानीय हितों को लेकर विशेष सतर्कता बरतना प्रशासन और कंपनियों—दोनों के लिए बड़ी चुनौती रहेगा।
खनन मानचित्र पर मजबूत होती पहचान
कुल मिलाकर, नवंबर माह में पूरी हुई गोपालटोला लौह अयस्क ब्लॉक की ई-नीलामी प्रक्रिया यह संकेत देती है कि साल्हेवारा–छुईखदान बेल्ट अब छत्तीसगढ़ के सक्रिय और रणनीतिक खनिज क्षेत्रों में मजबूती से उभर चुका है, जहां विकास की संभावनाओं के साथ-साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जिम्मेदारियाँ भी समान रूप से महत्वपूर्ण होंगी।