श्री सीमेंट के संडी ब्लॉक जनसुनवाई पर विधायक ने तुरंत रद्द करे - विधायक यशोदा वर्मा
खैरागढ़. श्री सीमेंट द्वारा संडी चूना पत्थर ब्लॉक (खनन पट्टा क्षेत्र 404 हेक्टेयर) में प्रतिवर्ष 3.64 मिलियन टन चूना पत्थर उत्पादन और कुल 8.991 मिलियन टन उत्खनन क्षमता वाले प्रस्तावित प्रोजेक्ट को लेकर विधायक यशोदा निलाम्बर वर्मा ने कलेक्टर से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की है। उन्होंने सोमवार को सुबह रेस्ट हाउस में प्रेसवार्ता लेकर कहा कि कंपनी द्वारा प्रस्तुत ड्राफ्ट ईआईए/ईएमपी में कई गंभीर खामियाँ हैं — मशीनरी एवं खनन विधियों के कारण उत्पन्न धूल, शोर तथा भूजल पर पड़ने वाले प्रभावों से बचाव के पर्याप्त उपाय रिपोर्ट में नहीं दिखाए गए हैं। कंपनी का मंशा पत्र मिलने के बावजूद खनन पट्टे का निष्पादन-पंजीकरण लंबित है, और सिर्फ 33 हेक्टेयर पंजीकृत होने के बावजूद पूरे 404 हेक्टेयर पर जनसुनवाई कराना अनुचित व अवैधानिक प्रतीत होता है। विधायक ने बताया कि कंपनी की रिपोर्ट में रोजगार लाभ केवल 138 लोगों का दर्शाया गया है, जबकि परियोजना से हजारों एकड़ सिंचित कृषि भूमि प्रभावित होगी और लगभग 20 हजार से अधिक कृषक परिवारों की आजीविका पर गंभीर संकट आ सकता है।
विधायक व स्थानीय प्रभावितों ने यह भी बताया कि पर्यावरण-वनस्पति, जल स्तर व सामाजिक-आर्थिक प्रभावों के लिये आवश्यक सूक्ष्म-मौसम विज्ञान और व्यापक आधारभूत सर्वेक्षण कंपनी द्वारा प्रभावी रूप से नहीं कराए गए। उन्होंने कहा कि मानसून पूर्व और पश्चात भूजल गहराई के मौजूदा आँकड़े (200 फीट तक से नीचे) पहले से ही चिंतनीय हैं और प्रस्तावित खनन के कारण भूतल जल स्तर और गहरा (रिपोर्ट के अनुसार संभावित 800 फीट तक) हो सकता है, जिससे पेयजल व सिंचाई दोनों पर अभूतपूर्व विपत्ति आएगी। विधायक ने 6 दिसंबर को शहीद नगरी छुईखदान में हुए हिंसक प्रदर्शन और लगातार जारी किसानों के विरोध को उद्धृत करते हुए 11 दिसंबर 2025 को प्रस्तावित जनसुनवाई को तत्काल रद्द करने और परियोजना के सामाजिक-आर्थिक व पर्यावरणीय प्रभावों की स्वतंत्र, पारदर्शी एवं विस्तृत समीक्षा कराने की माँग दोहराई। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जनता न चाहती है तो वे जनता के साथ खड़ी रहेंगी और आवश्यक कानूनी-नागरिक संघर्षों में साथ देंगी।
विधायक की अपील में स्थानीय ग्रामों — संडी, पंडरिया, बुंदेली, बिचारपुर, भरदागोंड समेत प्रभावित आसपास के लगभग 30 ग्रामों का उल्लेख है, जिनके निवासियों ने भी भारी असमर्थता व्यक्त की है। प्रेस वक्तव्य में यह तर्क भी रखा गया कि सिंचित कृषि भूमि पर बड़े पैमाने पर खनन उद्योग स्थापित करने की अनुमति सामाजिक-आर्थिक दृष्टि से अनुचित है और कुछ न्यायालयी निर्देशों व नीतियों के परिप्रेक्ष्य में भी विवादास्पद हो सकती है। विधायक ने कलेक्टर और राज्य सरकार से अनुरोध किया है कि वे स्थानीय किसानों व ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लें, माहौल शान्त करने तथा संवेदनशील जनहित को सुरक्षित रखने हेतु प्रस्तावित जनसुनवाई रद्द कराते हुए परियोजना के सभी पहलुओं की स्वतंत्र समीक्षा कराने का निर्देश दें।