404 हेक्टेयर विवाद पर कंपनी की सफाई—ग्रामीण बस्तियों को नहीं होगा कोई नुकसान

404 हेक्टेयर विवाद पर कंपनी की सफाई—ग्रामीण बस्तियों को नहीं होगा कोई नुकसान

पहली बार तोड़ी चुप्पी, अफवाहों पर किया बड़ा खुलासा

खैरागढ़. सीमेंट परियोजना पर चल रहे भारी विवादों के बीच कंपनी की ओर से पहली बार विस्तृत स्पष्टीकरण सामने आया है। केसीजी नवदर्पण संवाददाता से कंपनी प्रतिनिधि अंशुल जैन ने लंबी बातचीत में जमीन खरीद से लेकर रोजगार, पर्यावरण और खनन नियमों तक कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर कंपनी का पक्ष स्पष्ट किया। अंशुल जैन का कहना है कि गांवों में फैली कई गलत जानकारियाँ और अफवाहें किसानों में अनावश्यक भय पैदा कर रही हैं, जबकि वास्तविक स्थिति बिल्कुल अलग है।

जमीन खरीद के सवाल पर उन्होंने कहा कि कंपनी किसी किसान पर दबाव नहीं डालती, बल्कि बाजार मूल्य से अधिक दर देकर स्वेच्छा से जमीन खरीदी जाती है। क्षेत्र में पहले 14–15 लाख प्रति एकड़ तक का रेट था, लेकिन कंपनी ने 22 लाख प्रति एकड़ तक का ऑफर किया, जिससे किसानों को वास्तविक लाभ मिल सके। हमने किसानों से संपर्क करके जमीन खरीदे है क्योंकि हमारी कंपनी को जमीन की जरूरत है। जैन का कहना है कि किसानों को मनाने के लिए कुछ स्थानीय प्रभावशाली लोगों की मदद ली जाती है, और यह प्रक्रिया किसी भी बड़े प्रोजेक्ट में सामान्य है। 

404 हेक्टेयर विवाद पर सफाई—बस्ती को हाथ नहीं लगाएंगे, खनन बस्ती से 300 मीटर दूर ही होगा”

404 हेक्टेयर खनन क्षेत्र को लेकर उन्होंने स्पष्ट किया कि इतनी जमीन की जरूरत इसलिए दिखाई गई है क्योंकि सरकारी मानकों में पूरा खनन ब्लॉक दर्ज रहता है। इसमें गांवों की बस्तियां भी शामिल होती हैं, लेकिन खनन अधिनियम के अनुसार बस्ती से 300 मीटर के दायरे में खुदाई की कोई अनुमति नहीं होती। इसलिए बस्तियों को छूने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने बताया कि अब तक लगभग 180 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है और शेष भूमि केवल किसानों से बातचीत के आधार पर खरीदी जाएगी।

रोजगार का सबसे बड़ा दावा—138 प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर 7–8 हजार लोगों को मिलेगा रोज़गार

रोजगार को लेकर फैल रही गलतफहमी पर जैन ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने कहा कि 138 लोग डायरेक्ट कर्मचारी होंगे, जबकि 1500 से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से विभिन्न कार्यों में रोजगार पाएंगे। ट्रांसपोर्ट, मेंटेनेंस, मैनपावर एजेंसियों और सप्लाई चेन सहित कुल मिलाकर 7000–8000 लोगों को रोजगार मिलने की संभावना है। उन्होंने बलौदा बाजार व रायगढ़ की सीमेंट फैक्ट्रियों का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां अधिकतर रोजगार स्थानीय लोगों को मिलता है, बाहरी लोगों को लाना कंपनी के लिए नुकसानदायक होता है। क्योंकि बाहरी लोगों के रहने खाने पीने सभी की व्यवस्था करनी पड़ती है।

प्रदूषण पर कंपनी का पलटवार—200 करोड़ की मशीनरी से धूल उड़ना संभव ही नहीं

पर्यावरण को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए अंशुल जैन ने साफ कहा कि कंपनी 100–150 करोड़ रुपये की आधुनिक मशीनरी लगाएगी, जिसमें धूल उड़ना लगभग असंभव है। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों के प्रतिनिधियों को बलौदा बाजार प्लांट दिखाने की भी पेशकश की गई थी, ताकि उन्हें वास्तविक स्थिति का अंदाजा हो सके। उनका कहना है कि गलतफहमियों के कारण कंपनी का पक्ष ग्रामीणों तक पहुंच नहीं पा रहा।

हम पक्ष रखने बैठे, नेता सुने नहीं—कंपनी का आरोप, संवाद रोक रहा है राजनीति

उन्होंने यह भी कहा कि एसडीएम ने जब उन्हें ग्रामीणों के सामने अपना पक्ष रखने बुलाया, तो कई नेताओं ने सुनने से ही इनकार कर दिया। जैन का कहना है कि संवाद से ही समाधान निकलेगा, लेकिन यदि एक पक्ष सुनने तैयार ही न हो तो गलत धारणाएं गहरी होती जाती हैं। कंपनी का दावा है कि वह किसानों के हितों की अवहेलना नहीं कर रही बल्कि सभी नियमों का पालन कर पारदर्शिता के साथ काम करना चाहती है।

जैन ने अंत में कहा गलतफहमियों को दूर होने दीजिए, फायदे ग्रामीणों को ही होंगे। उनका कहना है कि कंपनी विकास, रोजगार और आर्थिक अवसर लाना चाहती है और इसके लिए संवाद का दरवाज़ा हमेशा खुला रहेगा।