इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में श्रुति मंडल का भव्य आयोजन
विद्यार्थियों ने दी कथक, भरतनाट्यम और ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुतियाँ
खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में गुरुवार 11 सितंबर को पाक्षिक सांस्कृतिक कार्यक्रम श्रुति मंडल का आयोजन बड़े उत्साह के साथ किया गया। कार्यक्रम में माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। नृत्य संकाय के विद्यार्थियों ने शिक्षकों के निर्देशन में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियाँ देकर दर्शकों का मन मोह लिया।
कथक और दरबारी तराना की प्रस्तुति
नृत्य संकाय की अधिष्ठाता प्रो. (डॉ.) नीता गहरवार के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने कथक नृत्य की एकल प्रस्तुति और दरबारी तराना का सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। इसमें सचिन कुमार, सुजीत कुमार सेन, कल्पना साहू, तनुश्री रॉय, पायल सिदार, उर्वशी कुमारी, पूनम कुमारी और पुखा नारजारी ने अपनी अद्भुत प्रस्तुति से सभागार में तालियों की गड़गड़ाहट गूंजा दी।
ओडिसी और भरतनाट्यम की झलक
सहायक प्राध्यापक सुशान्त कुमार दास ने केवट प्रसंग पर ओडिसी नृत्य की एकल प्रस्तुति दी। वहीं डॉ. शेख मेदिनी होम्बल के निर्देशन में भरतनाट्यम नृत्य की सामूहिक और एकल प्रस्तुतियाँ हुईं, जिसमें होरिल गौर, रोशनी देवांगन, साक्षी तोकल, मानसी देवांगन, कुसुम सोनी, अनुपमा तिवारी, खुशबू भूमिज, अनुकृति सिंह और दीप्ति निषाद ने अपनी नृत्य-कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।
कोणार्क कीर्ति पर सामूहिक नृत्य
कार्यक्रम का समापन ओडिसी नृत्य की सामूहिक प्रस्तुति कोणार्क कीर्ति से हुआ। इसमें हिमानी सारथी, हीना दास, दुर्गेश्वरी पाल, अर्पित इनवाती और सुधा योजन ने रंगमंच को जीवंत कर दिया।
संगीत और संगत ने सजाया वातावरण
नृत्य प्रस्तुतियों में सारंगी पर मोहम्मद शफीक हुसैन, हारमोनियम और गायन पर ए. रोशन कुमार, तबले पर दीपक दास महंत और पढ़न्त पर ऋषभ साहू ने अपनी कला से चार चांद लगाए।
गरिमामय उपस्थिति
इस अवसर पर प्रभारी कुलसचिव डॉ. सौमित्र तिवारी, अधिष्ठाता संगीत संकाय प्रो. (डॉ.) नमन दत्त, अधिष्ठाता छात्र कल्याण डॉ. देवमाईत मिंज, संयोजक डॉ. दीपशिखा पटेल, सदस्य डॉ. दिवाकर कश्यप, डॉ. लिकेश्वर वर्मा, डॉ. शिवाल बैस, जगदेव नेताम सहित विश्वविद्यालय के शिक्षकगण, अतिथि व्याख्यातागण, संगतकार एवं शोधार्थी–विद्यार्थी बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
कार्यक्रम का मंच संचालन और वाचन मौलश्री सिंह एवं प्रज्ञा प्रसाद ने किया।