बालाजी अस्पताल विवाद पर प्रबंधन की सफाई, बोले– अवैध वसूली और गर्भाशय निकालने की खबरें निराधार

बालाजी अस्पताल विवाद पर प्रबंधन की सफाई, बोले– अवैध वसूली और गर्भाशय निकालने की खबरें निराधार

खैरागढ़. बालाजी हॉस्पिटल पर लगे अवैध वसूली और तयशुदा रकम से अधिक पैसे वसूलने के आरोपों पर मंगलवार को अस्पताल प्रबंधन ने प्रेस वार्ता कर अपना पक्ष सामने रखा। डायरेक्टर दुष्यंत अग्रवाल ने कहा कि मरीज के परिजनों की गलतफहमी और फैली अफवाहों के कारण पूरे मामले को गलत ढंग से प्रस्तुत किया गया। उन्होंने दावा किया कि अस्पताल ने आपात स्थिति में केवल मरीज की जान बचाने पर ध्यान दिया और इलाज शुरू करने से पहले कोई आर्थिक शर्त नहीं रखी।

24 घंटे बाद गंभीर हालत में भर्ती

अग्रवाल ने बताया कि मरीज की स्थिति पहले से ही बेहद गंभीर थी। ऑपरेशन से लगभग 24 घंटे पूर्व परिजनों को फोन पर अनुमानित खर्च लगभग 25 हजार रुपये बताया गया था, लेकिन वे तत्काल अस्पताल नहीं लाए। पहले उन्होंने मरीज को छुईखदान के सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया, जहां सुविधाओं के अभाव में महिला की हालत और बिगड़ गई। रात में जब उसे बालाजी अस्पताल लाया गया, तब वह अचेत थी। जांच में उसका हिमोग्लोबिन सिर्फ 4 ग्राम पाया गया और लगातार रक्तस्राव हो रहा था। सोनोग्राफी रिपोर्ट से स्पष्ट हो गया कि महिला को एपटॉपिक प्रेग्नेंसी थी, जो जानलेवा स्थिति है।

इमरजेंसी में बुलाए गए सर्जन

डायरेक्टर के अनुसार, मरीज की हालत गंभीर देखते हुए उसी रात भिलाई से विशेषज्ञ सर्जन बुलाए गए। ओपन सर्जरी की बजाय लेप्रोस्कोपिक सर्जरी की गई, जिससे रक्तस्राव कम हुआ। इस दौरान 4 यूनिट ब्लड और 4 यूनिट प्लाज्मा की तत्काल व्यवस्था कराई गई। उन्होंने बताया कि अस्पताल की नीति के अनुसार गंभीर मरीजों का इलाज बिना अग्रिम भुगतान के तुरंत शुरू कर दिया जाता है। इसलिए ऑपरेशन शुरू होने से पहले परिजनों से कोई राशि नहीं ली गई।

खर्च और सहमति को लेकर विवाद

अग्रवाल ने कहा कि तीसरे दिन परिजनों से 10 हजार और पांचवें दिन 5 हजार रुपये जमा कराए गए, जबकि उस समय तक लगभग 65 हजार रुपये का खर्च हो चुका था। उनका कहना था कि मेडिकल लाइन में केवल ऑपरेशन थिएटर का खर्च अनुमानित रूप से बताया जा सकता है, लेकिन बाद में दवाइयां, ब्लड और प्लाज्मा जैसी जरूरतें भी जुड़ जाती हैं। इसी कारण खर्च बढ़ गया और इसे अवैध वसूली कहना अनुचित है।

गर्भाशय निकालने की खबर झूठी

डायरेक्टर ने यह भी स्पष्ट किया कि महिला का गर्भाशय नहीं निकाला गया। उन्होंने कहा कि इस तरह की अफवाहें पूरी तरह निराधार हैं और जानबूझकर अस्पताल की छवि धूमिल करने की कोशिश की जा रही है।

परिजनों का बदलता बयान

दूसरी ओर, मरीज के परिजनों ने भी सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर होने के कारण उन्होंने मदद की अपील की थी। पैसों की कमी के चलते उन्हें लगा कि अस्पताल अधिक राशि मांग रहा है, लेकिन वास्तव में प्रबंधन ने ईमानदारी से इलाज किया। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि शुरुआती बयान में भ्रम उनकी कम समझ और तनाव की वजह से हुआ।

स्वास्थ्य विभाग की जांच

जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि शिकायत मिलते ही जांच टीम को अस्पताल भेजा गया। उन्होंने कहा कि बालाजी अस्पताल को फिलहाल अस्थायी (टेम्परेरी) लाइसेंस जारी किया गया है, जिसके तहत सीमित सेवाओं की अनुमति है। अब यह जांच की जाएगी कि अस्पताल को किन सेवाओं की अनुमति दी गई थी और क्या उसने लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन किया है। टीम की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।