30 मीटर से अधिक खनन नहीं, लीज़ के बाहर डम्प नहीं — कंपनी की कानूनी प्रतिबद्धता

30 मीटर से अधिक खनन नहीं, लीज़ के बाहर डम्प नहीं — कंपनी की कानूनी प्रतिबद्धता

भास्कर न्यूज | खैरागढ़

कंपनी प्रतिनिधियों ने कहा — जमीन खरीद पारदर्शी तरीके से हुई, 30 मीटर से अधिक खनन नहीं, डिस्पोजल केवल माइनिंग लीज़ के भीतर और स्थानीय लोगों को प्राथमिकता पर ध्यान।

स्थानीय लोगों के सवालों और चिंताओं के बीच श्री सीमेंट कंपनी ने स्पष्ट और सकारात्मक पक्ष रखते हुए कहा है कि प्रस्तावित सिस्टेमेटिक विकास व रोजगार के अवसर क्षेत्र का लाभ बढ़ाएंगे और पर्यावरण-संबंधी नियमों का पूरा पालन किया जाएगा। कंपनी ने अपने बयान में जमीन खरीदारी, माइनिंग सीमा, पानी व प्रदूषण नियंत्रण तथा क्लोजर प्लान पर विस्तार से जानकारी दी।

सोमवार को रेस्ट हाउस में जिला प्रशासन और श्री सीमेंट कंपनी के कॉरपोरेट जोनल हेड रवि तिवारी तथा छत्तीसगढ़ हेड प्रमोद दुबे ने संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर पूरी स्थिति स्पष्ट की। इस दौरान कलेक्टर इंद्रजीत सिंह चंद्रावाल, जिला पंचायत सीईओ प्रेम कुमार पटेल तथा खनिज अधिकारी इंद्रलाल उपस्थित थे।

कंपनी के अनुसार, अब तक लगभग 180 एकड़ जमीन खरीदी जा चुकी है और 20 एकड़ के लिए एग्रीमेंट प्रक्रियाधीन है। माइनिंग लीज़ कुल 404 हेक्टेयर पर ली गयी है और नियमों के अनुरूप आउटफॉल (डम्पिंग) केवल इसी लीज़ के अंदर रखा जाएगा — लीज़ के बाहर वेस्टेज नहीं रखा जाएगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि अधिकतम खनन गहराई 30 मीटर तक ही है, और उससे अधिक गहराई पर अनुमति नहीं दी गई है।

रोज़गार व स्थानीय फायदा — कंपनी ने कहा कि प्लांट व माइनिंग एक्टिविटीज से प्रत्यक्ष रूप से करीब 138 लोगों को स्थायी रोजगार मिल सकता है जबकि ठेकेदारों व सप्लाई चैन से जुड़े पूर्वानुमानों के अनुसार कम से कम 1,200 लोग रोजगार से जुड़े रहेंगे। कम्पनी ने यह दावा भी किया कि डायरेक्ट व इनडायरेक्ट प्रभाव मिलाकर क्षेत्र में 8–10 हज़ार लोगों तक को रोजगार मिलने की सम्भावना है।

पर्यावरण व पानी: कंपनी ने बताया कि माइनिंग के बाद जो पिट बनेंगे, उन्हें क्लोजर प्लान के अनुसार दो विकल्पों में से एक के तहत संभाला जाएगा — मिट्टी से भरकर जमीन को पहले जैसा लौटाया जाएगा या उसे वाटर पिट/टैंक में बदलकर स्थानीय उपयोग (मछली पालन, पेयजल व सिंचाई) के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। प्रारम्भिक तीन वर्षों में अंडरग्राउंड वाटर उपयोग की अनुमति के साथ ही कंपनी ने बताया कि उचित फिल्टरेशन संस्थाएं व वाटर मैनेजमेंट उपाय लागू किए जाएंगे। धूल नियंत्रण हेतु नियमित पानी छिड़काव और व्यापक पौधारोपण की गारंटी भी दी गई — औद्योगिक मानकों के अनुरूप लाखों पौधे लीज़ क्षेत्र व आसपास लगाने की योजना बताई गई है।

सामाजिक दायित्व और पारदर्शिता: कंपनी ने कहा कि सीएसआर तथा डीएमएफ फंड के जरिये स्थानीय विकास योजनाओं का समेकित क्रियान्वयन होगा। स्कूलों, स्वास्थ्य एवं इन्फ्रास्ट्रक्चर उन्नयन की योजनाएँ प्रस्तावित हैं तथा भर्ती और ठेका प्रक्रिया में पारदर्शिता के साथ स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी। कंपनी ने यह भी कहा कि कोई भी निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया व सार्वजनिक सुनवाई के बाद ही अंतिम होंगे और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद निरंतर जारी रहेगा।

प्रशासनिक और कानूनी पक्ष: प्रतिनिधियों ने कहा कि सभी नियमों, अनुमति प्रक्रियाओं और पर्यावरण नियमन का पालन अनिवार्य है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि किसी भी तरह की अफवाह या गलत जानकारी से बचने हेतु सत्यपरक और संतुलित जानकारी साझा की जाएगी। कंपनी ने भरोसा दिलाया कि सभी सवालों के जवाब दिए जा रहे हैं और मीडिया के साथ खुलकर संवाद आगे भी जारी रहेगा।

कंपनी के इस सकारात्मक रुख के बाद स्थानीय स्तर पर बातचीत की संभावनाएँ मजबूत हुई हैं। कंपनी ने कहा कि वे स्थानीय नेताओं व प्रशासन के साथ मिलकर आगे की प्रक्रियाओं को पारदर्शी और संवेदनशील ढंग से आगे बढ़ाएंगे ताकि क्षेत्र का समग्र विकास तथा पर्यावरण-सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

सीधी सवाल ( रवि तिवारी, कॉरपोरेट जोनल हेड )

प्रश्न — आपने कंपनियों के पक्ष में कहा कि जमीन खरीद पारदर्शी है; किन लोगों से और किस तरीके से जमीन खरीदी गई है?

उत्तर — जमीन खरीदी किसानों से सीधे हुई है — कंपनी बाजार मूल्य पर तथा लिखित एग्रीमेंट के साथ लेन-देन कर रही है। अब तक लगभग 180 एकड़ की रजिस्ट्री पूरी हो चुकी है और 20 एकड़ के लिए एग्रीमेंट प्रक्रिया में है। कोई जबरन ज़बरदस्ती नहीं हुई।

प्रश्न — कुछ लोगों का कहना है कि बाहर के लोग आएँगे और सामाजिक-समस्याएँ बढ़ेंगी (छेड़छाड़, आवास आदि)। कंपनी क्या गारंटी देती है?

उत्तर — कंपनी स्पष्ट कर रही है कि स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी — भर्ती, ठेके और सप्लाई में लोकल को प्राथमिकता मिलेगी। बाहरी कामगारों की संख्या नियंत्रित रहेगी; कॉलोनी बाते प्रशासनिक नियमों के अनुसार और कम्पनी नीति के तहत ही होंगी। महिलाओं की सुरक्षा गंभीर मुद्दा है — कंपनी स्थानीय समुदाय व प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा व संवेदनशीलता बनाए रखेगी।

प्रश्न — माइनिंग से बनने वाले वेस्ट/डम्प कहाँ रखेंगे? क्या लीज़ के बाहर डम्प रखा जाएगा?

उत्तर — कानूनी बाध्यता अनुसार वेस्ट केवल माइनिंग लीज़ (404 हेक्टेयर) के भीतर ही रखा जाएगा; लीज़ के बाहर डम्प नहीं रखा जा सकता। यह नियम कंपनी सख्ती से मानती है।

प्रश्न — खनन गहराई और ब्लास्टिंग के बारे में चिंता है — क्या सीमा है और क्या साउंड/वाइब्रेशन से घरों को नुकसान होगा?

उत्तर — अनुमति केवल 30 मीटर तक खनन की है — उससे अधिक नहीं। ब्लास्टिंग आधुनिक नियंत्रित तकनीकों से होगी; मानक के अनुरूप मॉनिटरिंग रहेगी। यदि किसी तरह की हानि होती है तो मुआवजा दिया जाएगा — कंपनी का दावा है कि कंट्रोल ब्लास्टिंग से साउंड पॉल्यूशन न्यूनतम रहेगा।

प्रश्न — पानी (वॉटर लेवल) पर प्रभाव के संबंध में लोग चिंतित हैं — आप क्या समझते हैं?

उत्तर — कंपनी ने बताया कि प्रारम्भिक तीन वर्षों में अंडरग्राउंड वॉटर के उपयोग की अनुमति मिली है परन्तु माइनिंग के बाद पिट को या तो मिट्टी से भरकर लौटाया जाएगा या वाटर पिट/टैंक में बदलकर स्थानीय उपयोग (पेयजल, मछली पालन, सिंचाई) के रूप में दिया जा सकता है। कंपनी का दावा है कि इससे वॉटर लेवल प्रभावित नहीं होगा; क्लोजर प्लान और मॉनिटरिंग अनिवार्य होगी।

प्रश्न — सड़कों/नहर/हाई-टेंशन लाइनों के रास्ते प्रभावित हुए तो क्या होगा?

उत्तर — अगर किसी सरकारी रोड/नहर/HT लाइन का मार्ग खनन क्षेत्र से गुजरता है तो कंपनी सरकार से परमिशन लेकर या फिर जिम्मेदारी लेकर डायवर्सन/रास्ता बनाएगी — यह कंपनी की जिम्मेदारी होगी और जरूरी ज़मीन व प्रावधानों के अनुसार किया जाएगा।

प्रश्न — रोजगार के अनुमान और संख्या कितनी हैं — और क्या भर्ती स्थानीय स्तर पर होगी?

उत्तर — कंपनी ने बताया — सीधे तौर पर लगभग 180 नौकरियाँ प्लांट में और ठेकों/सप्लाई चैन से जोड़कर लगभग 1,200 तक सीधे तथा कुल मिलाकर डायरेक्ट+इनडायरेक्ट 8-10 हज़ार तक रोजगार का लाभ मिलेगा। भर्ती में स्थानीय लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी और कॉन्ट्रैक्टर्स में भी लोकल श्रमिकों को प्राथमिकता का