जनपद में सीईओ ने टेंट पंडाल के नाम पर फाड़े 6 लाख का बिल : अध्यक्ष सहित सदस्यों को जानकारी नहीं
00 खैरागढ़ जनपद में भ्रष्टाचार का महाघोटाला, सीईओ के बिल फाड़ने से लेकर सदस्यों की चुप्पी तक… सब बेनकाब
खैरागढ़ जनपद पंचायत में भ्रष्टाचार के आरोपों की लंबी फेहरिस्त अब खुलकर सामने आ रही है। तत्कालीन सीईओ नारायण बंजारा ने अपना स्थानांतरण होने से पहले जिस तरह से लाखों के बिल बिना अनुमति काटे, उससे पूरे जनपद की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सोनपुरी में राज्यपाल के कार्यक्रम के नाम पर रमेश टेंट हाउस को दो अलग-अलग बिलों के जरिए करीब 6 लाख रुपये का भुगतान किया गया। वह भी जनपद सदस्यों और अध्यक्ष को जानकारी दिए बगैर। जानकारी अनुसार जुलाई में 3,49,627 रुपये, अगस्त में 2,54,390 रुपये जनपद पंचायत खैरागढ़ द्वारा और सोनपुरी पंचायत द्वारा सितंबर में 27,500 रुपये स्वालापहार पर खर्च किए है।
सदस्यों को जब भुगतान की जानकारी लगी तो नाराज़गी व्यक्त की गई, लेकिन विरोध की आवाज़ फिर सामान्य सन्नाटे में बदल गई। सूत्र बताते हैं कि अब सदस्य इस प्रकरण की शिकायत उच्च अधिकारियों से करने की तैयारी में हैं।
सदस्यों की सुस्ती का पूरा फायदा उठाते रहे सीईओ
जनपद के अंदर सत्तापक्ष और विपक्ष, दोनों की चुप्पी ने भ्रष्टाचार को खुली छूट दे दी। सामान्य सभा की बैठकों में न तो खर्च का हिसाब माँगा गया और न ही बिलों की सत्यता पर सवाल उठाए गए। इस सुस्ती का फायदा उठाकर तत्कालीन सीईओ बंजारा लगातार अध्यक्ष और सदस्यों की जानकारी के बिना भुगतान करते रहे और बाद में बैठक में अनुमोदन भी करा लेते थे।
भाजपा सदस्य छवि बचाने में जुटे और विपक्ष दोस्ती निभाने
पिछले एक साल से चर्चा में रहा जनपद पंचायत खैरागढ़—जहाँ भाजपा की अध्यक्ष और सदस्य फर्जीवाड़ों की जानकारी होने के बावजूद अपनी सरकार की छवि बचाने में जुटे रहे, जबकि विपक्ष भी बिना संघर्ष के पूरी तरह ढीला पड़ा रहा।
सूत्रों का दावा है कि विपक्ष के नेताओं को सत्ता पक्ष के कुछ नेताओं द्वारा दोस्ती का हवाला देकर शांत करा दिया जाता है, जिससे विपक्ष की भूमिका लगभग समाप्त हो गई है।
बैठकें बंद कमरे में, चौकीदार दरवाजे पर—पारदर्शिता गायब
जनपद की बैठकों को बंद कमरे में किया जाने लगा—दरवाज़े पर चौकीदार बैठा दिए जाते थे ताकि मीडिया या अन्य लोग भीतर न जा सकें। इसके बावजूद विपक्ष ने न विरोध दर्ज कराया और न ही किसी स्तर पर शिकायत की।
डीएससी शुल्क में अवैध वसूली, फिर भी विपक्ष खामोश
प्रथम सामान्य सभा में सत्ता पक्ष की सदस्य सरस्वती सन्नी यदु ने खुलासा किया था कि सरपंचों से 3,000 रुपये प्रति डीएससी की अवैध वसूली की गई है, लेकिन न सत्ता पक्ष और न विपक्ष ने इस पर जांच करवाने की कोशिश की। मुद्दा उठकर फिर उसी दिन दफन हो गया।
सीसी कैमरा और रूम मरम्मत में दोहरा भुगतान – फिर भी चुप्पी
सीसी कैमरा और अध्यक्ष–उपाध्यक्ष–डीईओ कक्ष के जिर्णोद्वार के लिए दो खातों से दो बार भुगतान किए जाने का गंभीर मामला सामने आया, लेकिन हैरानी की बात यह कि दोनों पक्ष शांत बैठे रहे। जिला पंचायत भी केवल शिकायत का इंतजार करती रही—कोई कार्रवाई नहीं।
बिना कार्यक्रम कराए निकाले हजारों–लाखों रुपये
जन समस्या निवारण शिविर के नाम पर बिना कार्यक्रम कराए लाखों रुपये खर्च दिखाने का मामला भी सामने आया। सत्ता और विपक्ष—दोनों ने ही अधिकारियों की मदद करते हुए किसी भी जांच टीम के गठन की मांग नहीं की। जिला पंचायत भी खामोश है।
अध्यक्ष–सीईओ आमने–सामने : बिलों की असली कहानी बाहर आने को तैयार
विवाद तब और गहरा गया जब अध्यक्ष और तत्कालीन सीईओ आमने–सामने आ गए। विपक्ष का दावा है कि सीईओ अध्यक्ष के बिना अनुमति कोई बिल नहीं काट सकता, जबकि अध्यक्ष कहते हैं कि सीईओ ने बिना पूछे बिल फाड़े और उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। अध्यक्ष का कहना है कि शिकायत की जाएगी और बिलों को अनुमोदन नहीं किया जाएगा जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती।
नए अध्यक्ष के कार्यकाल में 22 लाख रुपये का खर्च, फिर भी कोई सवाल नहीं
नए अध्यक्ष के पदभार ग्रहण करने के बाद जनपद में अब तक 22 लाख रुपये से अधिक खर्च किया जा चुका है। कई सामानों की खरीदी ऊँचे दामों पर हुई है, लेकिन न सत्ता पक्ष सवाल उठा रहा है, न विपक्ष—सब एक-दूसरे को बचाने में लगे हैं। खैरागढ़ जनपद पंचायत में हो रहे इन आर्थिक अनियमितताओं और बिलों के खेल ने यह साफ कर दिया है कि सत्तापक्ष और विपक्ष दोनों ही अपनी-अपनी भूमिका छोड़ भ्रष्टाचार की चादर तानकर बैठ गए हैं।
टेंट पंडाल का जो बिल लगा है उसके संबंधित जानकारी नहीं है मैं जानकारी लेकर ही कुछ बता पाऊंगा अगर सीईओ ने बिना जानकारी के बिल फाड़ा है तो इसकी जांच कराई जाएगी फिर बिलों का अनुमोदन किया जाएगा। रही बात पुराने मामले की तो उसकी जांच के लिए पत्र लिखे है लेकिन अभी तक जांच नहीं हुई है।
राजेश्री त्रिपाठी, अध्यक्ष जनपद पंचायत खैरागढ़
मैं निजी कारण और स्वास्थ्य ठीक नहीं होने की वजह से मैं अभी जनपद नहीं जा पा रहा हूं जनपद जाने के बाद ही पूरे मामला क्लियर होगा अगर टेट पंडाल का लागत से अधिक बिल फाड़ा है तो अध्यक्ष की जानकारी के बगैर नहीं हो सकता अध्यक्ष को जानकारी है अध्यक्ष झूठ बोल रहा है। इसकी जांच कराने पत्राचार किया जाएगा।
आकाशदीप गोल्डी, सदस्य, पंचायत खैरागढ़