जनपद पंचायत छुईखदान में बजट नियमों की अनदेखी, बिना सामान्य सभा की मंजूरी भेजा गया बजट
खैरागढ़. छत्तीसगढ़ जनपद पंचायत (बजट अनुमान) नियम, 1997 को दरकिनार कर छुईखदान जनपद पंचायत में बजट अनुमोदन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। जानकारी के अनुसार लगातार पत्राचार और नियमों की याद दिलाने के बावजूद मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने बजट को सामान्य प्रशासन समिति (नियम 4, 5, 6) और जनपद पंचायत की सामान्य सभा (नियम 16(1)) से अनुमोदित कराने के बजाय केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर कराकर उपसंचालक को भेज दिया। यह कदम नियम 16(2) का भी सीधा उल्लंघन है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि केवल सामान्य सभा से अनुमोदन के बाद ही बजट उच्च अधिकारी को भेजा जा सकता है।
नियम स्पष्ट, प्रक्रिया उल्टी
बजट प्रक्रिया को लेकर नियम 1997 में साफ प्रावधान हैं। नियम 4 और 5 के मुताबिक, पहले सामान्य प्रशासन समिति और स्थायी समितियों को निधियों का विवरण और बजट अनुमान तैयार करना होता है। उसके बाद नियम 6 के अनुसार समिति की संवीक्षा कर बजट प्रस्ताव जनपद पंचायत के समक्ष रखा जाता है। इसके बाद नियम 16(1) के तहत सामान्य सभा में सभी निर्वाचित सदस्यों द्वारा विचार-विमर्श और अनुमोदन अनिवार्य है। अनुमोदन के बाद ही नियम 16(2) के अनुसार बजट उपसंचालक या विहित अधिकारी को भेजा जा सकता है।
लेकिन छुईखदान जनपद पंचायत में यह पूरी प्रक्रिया ही दरकिनार कर दी गई। न तो सामान्य प्रशासन समिति की बैठक बुलाई गई, न ही सामान्य सभा में चर्चा हुई। केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के हस्ताक्षर कराकर बजट को आगे भेजा जाना नियम 4 से 6 और नियम 16(1) व 16(2) की खुली अवहेलना मानी जा रही है।
नियम 15 का भी उल्लंघन
नियम 15 में स्पष्ट प्रावधान है कि मुख्य कार्यपालन अधिकारी बजट की प्रति जनपद पंचायत के सभी सदस्यों में प्रचालित करेगा। इससे पारदर्शिता सुनिश्चित होती है और सदस्य बजट पर समय रहते विचार कर सकते हैं। मगर छुईखदान जनपद पंचायत में यह नियम भी दरकिनार कर दिया गया। सदस्यों का कहना है कि उन्हें बजट की कॉपी तक उपलब्ध नहीं कराई गई।
सभापति डोमार सिंह भेड़िया ने बताया कि मैं जनपद पंचायत का सभापति हूं, लेकिन मुझे खुद नहीं पता कि बजट का अनुमोदन कब और कैसे कर दिया गया। आज तक मुझे बजट की प्रति तक नहीं दी गई। मुख्य कार्यपालन अधिकारी तक मुझे पहचानने से इनकार करते हैं। यह प्रतिनिधियों का अपमान है।
सभापति राजिम मुकेश ने बताया कि उनको उपाध्यक्ष के द्वारा बताया गया है कि बचत का अनुमोदन कर दिया गया है, लेकिन मुझे इसकी कोई जानकारी नहीं है। हर बैठक में मौजूद रहने के बावजूद कभी बजट पर चर्चा नहीं हुई। यह निर्वाचित सदस्यों को अंधेरे में रखकर नियमविरुद्ध बजट पास करने जैसा है।”
प्रशासन की सफाई
सीईओ रवि कुमार ने कहा कि वे श्रद्धांजलि कार्यक्रम में व्यस्त हैं और विस्तृत जानकारी सहायक लिपिक लीकेश तिवारी से ली जा सकती है। वहीं उपसंचालक पंचायत गीत कुमार सिन्हा ने बताया कि बचत की कॉपी अनुमोदन हेतु प्राप्त हुई है और नियमों के पालन की जांच की जा रही है।
सीधी बात ( लीकेश तिवारी, सहायक ग्रेड-2 लिपिक जनपद पंचायत छुई खदान)
प्रश्न: क्या बजट (बचत) का अनुमोदन सामान्य प्रशासन समिति और सामान्य सभा की बैठक में हुआ है?
उत्तर : हाँ, बैठक की कार्रवाई पंजी देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि सामान्य सभा और सामान्य प्रशासन समिति की बैठक में बचत का अनुमोदन हुआ है। पहले मैंने भी ध्यान से नहीं देखा था, इसलिए मुझे भ्रम रहा कि अनुमोदन हुआ है या नहीं।
प्रश्न: पिछली बैठक में जब आपसे पूछा गया कि बचत का अनुमोदन हुआ है या नहीं, तो आपने स्पष्ट उत्तर क्यों नहीं दिया?
उत्तर: उस समय मुझसे कहा गया था कि हाँ या ना में जवाब दीजिए। लेकिन यह सवाल इतना सरल नहीं था। मैंने कहा था कि शायद अनुमोदन नहीं हुआ है। बाद में जब कार्रवाई पंजी देखा तो पाया कि अनुमोदन हो चुका है।
प्रश्न: क्या बैठक में सभी सदस्यों से चर्चा और अनुमोदन हुआ था?
उत्तर: हाँ, बैठक में बचत पर चर्चा की गई और उसके बाद सभी सदस्यों ने अनुमोदन किया।
प्रश्न: क्या बजट अनुमोदन में सभी सदस्यों के हस्ताक्षर अनिवार्य होते हैं?
उत्तर: नहीं, फॉर्मेट के अनुसार केवल अध्यक्ष और सीईओ के हस्ताक्षर आवश्यक होते हैं। सभी सदस्यों का हस्ताक्षर उसमें जरूरी नहीं होता।
प्रश्न: क्या सदस्यों को बचत की कॉपी समय पर दी गई थी?
उत्तर: पिछले समय पर सदस्यों को बचत की कॉपी दी गई होगी, लेकिन मुझे इसकी पूरी जानकारी नहीं है। मैं हर बैठक में मौजूद नहीं रहता बीच बीच में जाता हु। मीटिंग में प्रायः कोमल करके जो कर्मचारी हैं, वही लगातार बैठते हैं।