इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में संस्कृत दिवस उत्सव सम्पन्न

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय में संस्कृत दिवस उत्सव सम्पन्न

00 संस्कृत विभाग के विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए नृत्य, प्रश्नमंच प्रतियोगिता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण पर व्याख्यान

खैरागढ़. इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ के संस्कृत विभाग द्वारा शनिवार, 23 अगस्त को संकाय स्तर पर संस्कृत दिवस का आयोजन बड़े उत्साह और गरिमा के साथ किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृत विभाग की विभागाध्यक्ष एवं कला संकाय की अधिष्ठाता प्रो. डॉ. मृदुला शुक्ल ने की।

भरतनाट्यम् से हुई शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत बीपीए द्वितीय वर्ष के छात्र चिराग यादव की भरतनाट्यम् शैली में नटराज नृत्य प्रस्तुति से हुई। इस मनमोहक प्रस्तुति के बाद विद्यार्थियों के बीच प्रश्नमंच प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें 20 छात्र-छात्राओं को पाँच समूहों में विभाजित किया गया, जिनका नामकरण संस्कृत साहित्य के महाकवियों पर आधारित रहा—भर्तृहरि, कालिदास, भास, भरतमुनि और भवभूति।

प्रतियोगिता में दिखी मेधा

प्रथम स्थान (भर्तृहरि समूह, 60 अंक) समृद्धि तिवारी, पूजा सिंह ठाकुर, हर्षवर्धन उपाध्याय और आमीन साहू, वही द्वितीय स्थान (भरतमुनि समूह, 50 अंक) दुर्गादेवी शर्मा, समीरचन्द्र साहू, टिया वानखेडे, तृतीय स्थान (भवभूति समूह, 40 अंक) प्रिया श्रीवास और वैष्णवी पाण्डे की समूह ने प्राप्त किया। निर्णायक मंडल में डॉ. चैनसिंह नागवंशी (इतिहास विभाग) और डॉ. मुजफ्फर हुसैन (अंग्रेजी विभाग) शामिल रहे।

संस्कृत और विज्ञान का संगम

कार्यक्रम के अगले चरण में नीलम श्रीवास्तव और डॉ. लक्ष्मी श्रीवास्तव ने “संस्कृते विज्ञान-बोध” विषय पर पावरपॉइंट प्रस्तुति दी। इसमें तैत्तिरीय संहिता में सौर ऊर्जा, सिद्धांत शिरोमणि में गुरुत्वाकर्षण, वैशेषिक दर्शन में गति के नियम और रसार्णवपटल में चुंबक संबंधी प्रमाणों को प्रस्तुत किया गया।

गीत-गजल और प्रेरणादायी उद्बोधन

विद्यार्थियों ने सामूहिक संस्कृत सैन्य-गीत प्रस्तुत कर वातावरण को गूंजायमान किया। इसके बाद छात्रा पूर्णिमा ने पद्मश्री अभिराज राजेन्द्र मिश्र की रचना “औदुम्बरी” से गजल की एक अनूठी प्रस्तुति दी।

उद्बोधन की कड़ी में डॉ. कौस्तुभ रंजन (अंग्रेजी विभाग) ने संस्कृत की वैश्विक महत्ता और ग्रंथों के अंग्रेजी अनुवाद पर प्रकाश डाला। वहीं डॉ. मंगलानंद झा (इतिहास विभाग) ने विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए उन्हें आगे कार्य करने हेतु प्रेरित किया।

अध्यक्षीय संबोधन और समापन

कार्यक्रम की अध्यक्ष प्रो. डॉ. मृदुला शुक्ल ने कहा कि संस्कृत मात्र पूजापाठ की भाषा नहीं, बल्कि संस्कार और जीवन मूल्यों को देने वाली भाषा है। सहायक प्राध्यापिका डॉ. पूर्णिमा केलकर ने आभार व्यक्त किया। समृद्धि तिवारी द्वारा प्रस्तुत राज्यगीत और शांति मंत्र के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

उल्लेखनीय उपस्थिति

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों के शिक्षक, शोधार्थी और छात्र-छात्राओं की सक्रिय भागीदारी रही। संचालन शोध छात्र अतुल त्रिपाठी ने किया