सेवा सहकारी समिति प्रबंधक पर गंभीर आरोप, किसानों ने जांच और बर्खास्तगी की मांग की

सेवा सहकारी समिति प्रबंधक पर गंभीर आरोप, किसानों ने जांच और बर्खास्तगी की मांग की

खैरागढ़. सेवा सहकारी समिति पांडादाह के प्रबंधक जितेंद्र कौशिक पर किसानों ने गंभीर अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के आरोप लगाते हुए जिला कार्यालय केसीजी में उप पंजीयक एवं कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। किसानों ने आवेदन में कहा है कि समिति प्रबंधक की कार्यशैली से किसानों में गहरा असंतोष है और अब उनका धैर्य जवाब दे चुका है।

धान खरीदी, खाद वितरण और केसीसी में गड़बड़ी का आरोप

किसानों का आरोप है कि समिति प्रबंधक धान खरीदी के नाम पर अवैध वसूली करता है। नए सदस्य बनाने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) जारी करने के नाम पर भी किसानों से मनमानी रकम वसूली जाती है। इसके अलावा खाद वितरण में भी गंभीर गड़बड़ी और अतिरिक्त वसूली की शिकायतें सामने आई हैं। किसानों ने बताया कि जब कोई उनकी मांगों को लेकर सवाल उठाता है तो प्रबंधक उनसे अभद्र व्यवहार करता है।

आमसभा में हिसाब मांगने पर टकराव

आवेदन में उल्लेख है कि 25 सितंबर को सोसायटी की आमसभा आयोजित की गई थी। इस दौरान किसानों ने आय-व्यय का विवरण मांगा, लेकिन प्रबंधक ने कोई जानकारी नहीं दी। आरोप है कि प्रबंधक ने किसानों से यह तक कह दिया कि उन्हें हिसाब लेने का कोई अधिकार नहीं है और गुस्से में सभा छोड़कर चले गए। इससे किसानों में गहरी नाराजगी और अविश्वास का माहौल है।

निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

किसानों ने उप पंजीयक से मांग की है कि प्रबंधक की अनियमितताओं और भ्रष्टाचार की निष्पक्ष जांच कराई जाए। उन्होंने कहा कि समिति के कार्यों में पारदर्शिता का अभाव है और भ्रष्टाचार की वजह से किसान लगातार आर्थिक और मानसिक परेशानी झेल रहे हैं। किसानों का कहना है कि जब तक दोषी प्रबंधक के खिलाफ कठोर कार्रवाई नहीं होगी, तब तक समिति की कार्यप्रणाली पर किसानों का भरोसा नहीं लौटेगा।

आंदोलन की चेतावनी, सैकड़ों किसानों के हस्ताक्षर

ज्ञापन पर सैकड़ों किसानों ने हस्ताक्षर किए हैं और साफ तौर पर चेतावनी दी है कि यदि समय पर जांच और कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए मजबूर होंगे। किसानों का कहना है कि समिति किसानों की सुविधा और सहायता के लिए बनी है, लेकिन प्रबंधक की मनमानी और भ्रष्टाचार ने इसे किसानों के शोषण का केंद्र बना दिया है।

प्रबंधक का पलटवार – "आरोप निराधार, राजनीतिक साजिश"

पांडादाहा समिति प्रबंधक जितेंद्र कौशिक ने कहा कि वह पूरी बैठक में शामिल था और सोसायटी का मोटा-मोटा हिसाब किसानों को बताया गया। किसानों के सारे सवालों के जवाब भी दिए गए हैं। आरोप पूरी तरह निराधार हैं। पूर्व जनपद सदस्य व वर्तमान जिला पंचायत सदस्य के पति राजू दाऊ व्यक्तिगत कारणों से मेरे खिलाफ लगातार शिकायतें करते रहते हैं। बैठक में मैनेजर भी मौजूद था और आय-व्यय की जानकारी दी गई। राजू दाऊ बार-बार बोरा, सुतली, रंग, झाड़ू व साफ-सफाई जैसे खर्चों का ब्योरा मांग रहे थे, जिस पर मैंने स्पष्ट कहा कि सोसायटी का हिसाब इस तरीके से नहीं चलता। शिकायत में जो किसानों के हस्ताक्षर दिखाए गए हैं, वे भी राजू द्वारा दबाव डालकर कराए गए हैं। अधिकारीगण पहले से जानते हैं कि इस तरह की कई शिकायतें पहले भी की गई हैं, जो सभी बेबुनियाद साबित हुईं।

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि का जवाब – "भ्रष्टाचार का सच सामने आएगा"

जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि राजू दाऊ ने कहा कि प्रबंधक मेरे ऊपर झूठा आरोप लगा रहा है। मैंने उन्हें कभी परेशान नहीं किया और न ही पहले कोई शिकायत की है। किसान जब हिसाब मांग रहे थे तो वह बिना जवाब दिए बैठक से उठकर चले गए। जहां तक जबरदस्ती हस्ताक्षर कराने की बात है, तो कोई किसान बेवजह क्यों हस्ताक्षर करेगा? सच्चाई यह है कि लगातार सोसायटी में भ्रष्टाचार हो रहा है और अब जब शिकायत हुई है तो प्रबंधक घबरा रहे हैं। जांच होगी तो पूरा सच सामने आ जाएगा।