खैरागढ़ महाविद्यालय में रजत जयंती महोत्सव सेमिनार संपन्न
छत्तीसगढ़ राज्य की विकास यात्रा पर छात्रों ने साझा किए विचार, प्रतियोगिताओं में दिखी प्रतिभा
खैरागढ़. छत्तीसगढ़ राज्य गठन के 25 वर्ष पूर्ण होने पर रानी रश्मि देवी सिंह शासकीय महाविद्यालय खैरागढ़ एवं शासकीय नवीन कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार, 9 सितम्बर 2025 को रजत जयंती महोत्सव के अंतर्गत एक दिवसीय सेमिनार का आयोजन हुआ। कार्यक्रम का विषय “छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा : 25 वर्ष” रहा, जिसमें विद्यार्थियों ने प्रदेश के विकास और भावी चुनौतियों पर गंभीर विमर्श किया।
अतिथियों ने किया मार्गदर्शन
मुख्य अतिथि सांसद प्रतिनिधि भागवत शरण सिंह ने अपने उद्बोधन में युवाओं को जागरूकता और रोजगार के अवसरों पर प्रेरणादायी विचार रखे। उन्होंने अपने भाषण को तीन हिस्सों में बांटते हुए खैरागढ़ और छत्तीसगढ़ के इतिहास, विकास और भविष्य की चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
शासकीय कन्या उच्चतर विद्यालय के प्राचार्य कमलेश्वर सिंह ने नैतिक शिक्षा और निरंतर प्रगति पर बल दिया।
प्रभारी प्राचार्य डाॅ. जे. के. साखरे ने कहा कि विद्यार्थियों को अतिथियों के विचारों को अपने जीवन में उतारना चाहिए।
महाविद्यालय के सेवानिवृत्त ग्रंथपाल जे. के. वैष्णव ने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को राज्य की उन्नति में योगदान देने का संदेश दिया।
सफल आयोजन
कार्यक्रम की संयोजिका सुश्री भबीता मंडावी ने नियोजित ढंग से आयोजन कर सफलता दिलाई। संचालन डाॅ. उमेंद कुमार चंदेल ने किया और आभार प्रदर्शन श्री यशपाल जंघेल (विभागाध्यक्ष, हिंदी) ने किया। इस अवसर पर दोनों महाविद्यालयों के शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में विद्यार्थी उपस्थित रहे।
प्रतियोगिताओं में छात्रों ने बटोरी सराहना
सेमिनार के बाद भाषण एवं पोस्टर प्रतियोगिता आयोजित हुई। भाषण प्रतियोगिता में प्रथम स्थान तामेश्वरी (बीए तृतीय वर्ष), द्वितीय स्थान हीना बर्मन (बीए प्रथम सेमेस्टर), तृतीय स्थान देवेंद्र पटेल (बीएससी तृतीय वर्ष) वहीं पोस्टर प्रतियोगिता में प्रथम स्थान लक्ष्मी वर्मा (एमएससी प्रथम सेमेस्टर), द्वितीय स्थान देवाशीष यदु (बीएससी तृतीय वर्ष), तृतीय स्थान देवराज निषाद (बीए तृतीय सेमेस्टर) ने प्राप्त किया।निर्णायक मंडल में सहायक प्राध्यापक सृष्टि वर्मा, मोनिका जत्ती एवं दुर्वासा सिन्हा शामिल रहे।
कार्यक्रम की सफलता में यूथ रेडक्रॉस सोसाइटी एवं एनएसएस के स्वयंसेवकों की विशेष भूमिका रही।