बागवानी मिशन में बड़ा फर्जीवाड़ा! किसानों ने लिया अनुदान, खेतों में पौधे ही नहीं
खैरागढ़. जिले के उद्यानिकी विभाग में भारी अनियमितताओं का मामला सामने आया है। आरटीआई से मिली जानकारी के अनुसार वित्तीय वर्ष 2023-24 के बागवानी मिशन योजना के तहत चयनित हितग्राहियों की सूची सामने आई। सूची में नाम दर्ज होने के बाद जब स्थानीय स्तर पर ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई तो बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।
खेतों में केले-पपीते के नाम पर अनुदान का खेल
रिकॉर्ड के मुताबिक सुराडबरी (छुईखदान) निवासी नारायण धुर्वे को 2.200 एकड़ में केला लगाने के लिए 40 प्रतिशत अनुदान के रूप में लगभग 82,500 रुपये दिए गए। लेकिन ग्राउंड पर जांच करने पर पता चला कि उनके खेत में कभी केले का पौधा लगाया ही नहीं गया। इसी प्रकार सुराडबरी निवासी चुरामन कौशल को 1.200 एकड़ में पपीता लगाने के लिए 27,000 रुपये और मकसुदन धुर्वे को 0.800 एकड़ में पपीता लगाने के लिए 18,000 रुपये का लाभ दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि इन किसानों ने अपने खेत में कभी पपीते की खेती नहीं की। खुद मकसुदन धुर्वे की मां ने स्वीकार किया कि उनके खेत में पपीते का एक भी पौधा नहीं लगाया गया है। नारायण धुर्वे ने भी माना कि उन्हें योजना का लाभ मिला, लेकिन वे योजना का नाम तक नहीं जानते। उन्होंने बताया कि छुईखदान के एक अधिकारी से उनके परिचित के माध्यम से संपर्क हुआ और उसी के जरिए फार्म भरकर पैसा मिल गया।
नियमों को ताक पर रखकर बांटा गया लाभ
नियमों के मुताबिक योजना का लाभ लेने के लिए ग्रामीण उद्यान विस्तार अधिकारी किसानों से आवेदन प्राप्त करता है, फिर ग्रामसभा से अनुमोदन कराकर वरिष्ठ उद्यान अधिकारी को प्रस्तुत करता है। वरिष्ठता सूची बनाकर जनपद पंचायत की कृषि स्थायी समिति से अनुमोदन लेना अनिवार्य होता है। लेकिन इस पूरे मामले में न तो ग्रामसभा में अनुमोदन कराया गया और न ही चयन की पूरी प्रक्रिया का पालन किया गया।
पूर्व सरपंच के भतीजे राकेश ने भी बताया कि उनके ( भाभी) कार्यकाल में ग्रामसभा में इस योजना का अनुमोदन नहीं कराया गया। गांव के लोगों का कहना है कि खेती की जमीन पर केले और पपीते की फसल कभी बोई ही नहीं गई।
अधिकारी का बयान और विपक्ष का हमला
इस फर्जीवाड़े पर जिला उद्यानिकी अधिकारी स्नेह लता सिन्हा का कहना है कि ग्रामीण विस्तार अधिकारी किसानों से संपर्क कर आवेदन भरवाते हैं और वे नियमित मॉनिटरिंग भी करते हैं। “ऐसा हो ही नहीं सकता कि पौधे लगाए बिना किसान को अनुदान मिल जाए,” उन्होंने दावा किया। साथ ही कहा कि यदि शिकायत आती है तो जांच कराई जाएगी।
किसान संघ में नाराजगी
किसान संघ के जिला संयोजक साधु राम धुर्वे ने बागवानी मिशन में हुए फर्जीवाड़े पर गहरी नाराजगी व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि विभागीय अधिकारियों को पूरे प्रकरण की जानकारी होते हुए भी जानबूझकर जांच नहीं की जा रही है। अधिकारी स्वयं के फंसने के डर से शिकायत का इंतजार कर रहे हैं, जबकि जिम्मेदार पद पर रहते हुए उन्हें तुरंत जांच टीम गठित कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।
धुर्वे ने आरोप लगाया कि विभाग की मिलीभगत से किसानों के नाम पर अनुदान की राशि हड़पी जा रही है। इसका खामियाजा वास्तविक पात्र किसानों को उठाना पड़ रहा है, जो योजना के लाभ से वंचित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि इससे शासन की योजना की मंशा पर पानी फिर रहा है और ईमानदार किसानों के साथ धोखा हो रहा है।
किसान संघ ने स्पष्ट कहा कि यदि एक सप्ताह के भीतर इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो किसान संघ उच्च अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेगा और आंदोलन के लिए बाध्य होगा।